रैदास का घर प्रेम का घर है
सेवा में
श्री नरेंद्र मोदी
माननीय प्रधान मंत्री
भारत सरकार
(विषय - रैदास का घर प्रेम का घर है)
सुना है, आप माघी पूर्णिमा के दिन यानी 22 फरवरी को संत रैदास के जनम दिन पर दर्शन करने और मत्था टेकने बनारस आ रहे हैं । आपकी इस यात्रा को लेकर बहुत से लोग हलकान हो रहे हैं । सबसे ज्यादा बनारस के सरकारी अधिकारी ; क्योंकि उन्हें सुरक्षा और प्रोटोकाल के हिसाब से इंतजाम करने के लिए एडी- चोटी का पसीना एक करना पड़ेगा । लेकिन सबसे ज्यादा हलकान बैठे-ठाले बुद्धिजीवी लोग हैं । उनके पेट में दर्द इसलिए हो रहा है कि उन्हें लगता है कि आप भक्ति भाव से नहीं पंजाब और उत्तर प्रदेश के आम चुनावों में दलित वोटों के लिए यह यात्रा कर रहे हैं । मुझे ऐसा नहीं लगता लेकिन अगर ऐसा हो भी तो कोई हर्ज नजर नहीं है । क्योंकि आप प्रधान मंत्री होने साथ एक राजनीतिक दल के प्रमुख सदस्य भी हैं। राजनीतिक दल कोई भजन मंडली तो है नहीं! उन्हें अपने आदर्श कार्यक्रम लागू करने के लिए सत्ता चाहिए । सत्ता के लिए वोट की चिंता करनी ही पड़ती है । हलकान होने वालों में श्री अरविंद केजरीवाल भी हैं। उत्तर प्रदेश और खास तौर से पंजाब में उनके राजनीतिक मंसूबे हैं । सो आप के पीछे -पीछे वे भी चले आ रहे हैं । दलित वोट को सुश्री मायावती अपना रिजर्व बैंक मानती हैं । काफी हद तक यह सही भी है । आप और श्री केजरीवाल दोनों की निगाहें बहन मायावती के रिजर्व बैंक पर टिकी हैं। अपने वोट बैंक की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी उन्हीं की बनती है । इसलिए उनका हलकान होना वाजिब है । वे तौर अपने तरीके से अपने वोट बैंक को बुरी नजर से बचाने का काम कर रही हैं । इसलिए जिन्हें बैठे –बैठे समय बिताना है,उन्हें यह सब अंत्याक्षरी खेलने दीजिये कि पिछले साल आप क्यों नहीं आए । यह भी कि तब नहीं आए तो अभी क्यों आ रहे हैं ? अब ऐसे लोगों को कौन समझाये कि हिंदुस्तान में इतने सारे तीर्थ हैं,और सबका एक से एक बढ़कर माहात्म्य है , सबकी यात्रा एक साथ नहीं की जा सकती । जब जैसा समय और सुतार बैठेगा आदमी अपनी तीर्थयात्रा का समय अपने हिसाब से तय करेगा । वैसे भी जिसे कुछ करना धारणा नहीं होता है वह दूसरों की टीका टिप्पणी करता रहता है ।
मैं मानता हूँ कि आप रैदास के पास सच्ची नीयत से जा रहे हैं और सही समय पर जा रहे हैं । मैं आपके इस निर्णय से बहुत खुश हूँ । देश के प्रधान मंत्री का और वह भी आप जैसे प्रधान मंत्री का, जो खुद को देश का प्रधान सेवक मानता रहा हो , रैदास मंदिर आना बहुत शुभ है ।संतों ने सेवा कार्य को विशेष महत्व दिया है । आपको याद होगा कि आपने देश में अच्छे दिन लाने का वायदा किया था । इसी संकल्प के साथ आप प्रधानमंत्री बने ।कहा जाता है कि शुभ संकल्प तभी पूरे होते हैं जब संग साथ भी शुभ हो । आपने संतों का संग साथ करने का निश्चय किया है,इसे मैं बहुत आशा भरी नजर से देख रहा हूँ । मुझे उम्मीद हो चली है कि अच्छे दिन आएंगे ।
इस मौके का फायदा उठाकर एक पते की बात धीरे से आपको बता देना चाहता हूँ । संत रैदास ने भी अपने समय में अच्छे दिन का सपना देखा था । बनारस के दो संतों रैदास और कबीर ने अच्छे दिन का एक नक्शा बनाया था । छ सौ से ज्यादा साल हो गए अभी तक रैदास के उस नक्शे के हिसाब से अच्छा दिन नहीं आया । यह जो लाखों की भीड़ आपको दिखाई दे रही है जो देश विदेश के कोने कोने से संत रैदास के दर्शन के लिए उमड़ पड़ती है ,वह चाहती है कि रैदास के नक्शे के हिसाब से देश बने ,समाज बने ।बहुत गहरे उसे यह भरोसा है कि अच्छे दिन संतों के बताए रास्ते से ही आएंगे ।
मैं जब से बनारस आया हूँ तबसे उस नक्शे के बारे में सुन रहा हूँ । संत रैदास और कबीर एक नया शहर बसाना चाहते थे । उस शहर का नाम उन लोगों ने रखा था ‘बेगमपुर’ । रैदास के पास इसका नक्शा है । संतों ने अपनी कल्पना के शहर की खूबियाँ बताई हैं । उन्होने शहर का नाम रखा बे-गमपुर । यहाँ रहने वाले को न कोई दुख होगा न ही किसी तरह की चिन्ता होगी । किसी तरह का टैक्स देने की फिक्र नहीं होगी । उस शहर में न किसी तरह का अपराध होगा न ही दण्ड का विधान । किसी को किसी तरह का भय भी नहीं होगा सब निर्भय होंगे ।यहाँ की शासन व्यवस्था सुद्र्ढ़ होगी। वह खौफ के बल पर नहीं ;बल्कि प्रेम और सद्भाव के बल चलेगी । इस शहर के सभी नागरिक निर्भय होकर रहेंगे । यह ऐसा खूबसूरत वतन होगा जहाँ खैरियत ही खैरियत होगी । इस शहर की बादशाहत मजबूत और मुकम्मल होगी । किसी को संविधान विरुद्ध कुछ करने का साहस नहीं होगा । इस शहर के सभी रहवासी अव्वल दर्जे के नागरिक होंगे । किसी को भी दूसरे या तीसरे दरजे का नागरिक नहीं समझा जाएगा । किसी से भेद भाव नहीं किया जाएगा । भरपूर रोजी रोटी और आबोदाना के लिए यह शहर मशहूर होगा । इस शहर में रहने वाले सुखी और हर तरह से सम्पन्न होंगे । किसी पर कोई रोक टोक नहीं होगी । जिसका जहाँ कहीं भी जाने का मन करेगा वह वहाँ आ जा सकेगा । ऐसे शहर की कल्पना संत रैदास ने की है । मुझे इसलिए भी खुशी हो रही है कि देश का प्रधान मंत्री संत रैदास की संगत चाहता है । मैंने यह भी सुन रखा है कि सभी तरह के मोह और बन्धनों से मुक्त संत रैदास की संगत उसे ही नसीब होगी जो उनके सपनों के शहर बेगमपुर का नागरिक होगा । वह शहर अभी बना तो है नहीं । पिछली किसी सरकार ने बेगमपुर एक्सप्रेस जरूर चला दिया है। वह चल तो रही है ;लेकिन कहीं पहुच नहीं रही है । किसी ने बेगमपुर शहर बसाने की जहमत ही नहीं उठाई । आप देश में कुछ नए शहर भी बसाने वाले हैं ,इसलिए आपसे उम्मीद है । अगर आप सचमुच रैदास की संगत चाहते हैं तो आपको ऐसा शहर बसाना पड़ेगा । आप चाहें तो ऐसा कर सकते हैं ।
मेरी गुजारिश है कि जब आप 22 फरवरी को संत रैदास से मिलें तो और जो बात करनी हो कर लें पर उनसे बेगमपुर का वह नक्शा ज़रूर मांग लीजिए । मेरा यकीन मानिए उस नक्शे में स्मार्ट सिटी का खाका भले ही न मिले भारत के अच्छे दिन का नक्शा जरूर मिल जाएगा । और तब आपका काम आसान हो जाएगा । भारत की सवा अरब आबादी ने आपको इतनी सामर्थ्य दी है कि आप बेगमपुर बना और बसा सकें । अपनी ओर से यह भी याद दिला देना चाहता हूँ कि रैदास का घर प्रेम का घर है । उसमें प्रेम भाव से ही प्रवेश मिलता है ,इतनी सावधानी तो आप बरतेंगे ही । इन्हीं बातों के साथ आपका रैदास के घर यानि बनारस के सीर गोबरधनपुर मुहल्ले में स्वागत है । सुखद और सफल यात्रा के लिए शुभकामनायें ।
आदर सहित
आपका -सदानन्द शाही ,वाराणसी के नागरिक
मतदाता पहचान पत्रINB1932326
18 फरवरी 2016।
श्री नरेंद्र मोदी
माननीय प्रधान मंत्री
भारत सरकार
(विषय - रैदास का घर प्रेम का घर है)
सुना है, आप माघी पूर्णिमा के दिन यानी 22 फरवरी को संत रैदास के जनम दिन पर दर्शन करने और मत्था टेकने बनारस आ रहे हैं । आपकी इस यात्रा को लेकर बहुत से लोग हलकान हो रहे हैं । सबसे ज्यादा बनारस के सरकारी अधिकारी ; क्योंकि उन्हें सुरक्षा और प्रोटोकाल के हिसाब से इंतजाम करने के लिए एडी- चोटी का पसीना एक करना पड़ेगा । लेकिन सबसे ज्यादा हलकान बैठे-ठाले बुद्धिजीवी लोग हैं । उनके पेट में दर्द इसलिए हो रहा है कि उन्हें लगता है कि आप भक्ति भाव से नहीं पंजाब और उत्तर प्रदेश के आम चुनावों में दलित वोटों के लिए यह यात्रा कर रहे हैं । मुझे ऐसा नहीं लगता लेकिन अगर ऐसा हो भी तो कोई हर्ज नजर नहीं है । क्योंकि आप प्रधान मंत्री होने साथ एक राजनीतिक दल के प्रमुख सदस्य भी हैं। राजनीतिक दल कोई भजन मंडली तो है नहीं! उन्हें अपने आदर्श कार्यक्रम लागू करने के लिए सत्ता चाहिए । सत्ता के लिए वोट की चिंता करनी ही पड़ती है । हलकान होने वालों में श्री अरविंद केजरीवाल भी हैं। उत्तर प्रदेश और खास तौर से पंजाब में उनके राजनीतिक मंसूबे हैं । सो आप के पीछे -पीछे वे भी चले आ रहे हैं । दलित वोट को सुश्री मायावती अपना रिजर्व बैंक मानती हैं । काफी हद तक यह सही भी है । आप और श्री केजरीवाल दोनों की निगाहें बहन मायावती के रिजर्व बैंक पर टिकी हैं। अपने वोट बैंक की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी उन्हीं की बनती है । इसलिए उनका हलकान होना वाजिब है । वे तौर अपने तरीके से अपने वोट बैंक को बुरी नजर से बचाने का काम कर रही हैं । इसलिए जिन्हें बैठे –बैठे समय बिताना है,उन्हें यह सब अंत्याक्षरी खेलने दीजिये कि पिछले साल आप क्यों नहीं आए । यह भी कि तब नहीं आए तो अभी क्यों आ रहे हैं ? अब ऐसे लोगों को कौन समझाये कि हिंदुस्तान में इतने सारे तीर्थ हैं,और सबका एक से एक बढ़कर माहात्म्य है , सबकी यात्रा एक साथ नहीं की जा सकती । जब जैसा समय और सुतार बैठेगा आदमी अपनी तीर्थयात्रा का समय अपने हिसाब से तय करेगा । वैसे भी जिसे कुछ करना धारणा नहीं होता है वह दूसरों की टीका टिप्पणी करता रहता है ।
मैं मानता हूँ कि आप रैदास के पास सच्ची नीयत से जा रहे हैं और सही समय पर जा रहे हैं । मैं आपके इस निर्णय से बहुत खुश हूँ । देश के प्रधान मंत्री का और वह भी आप जैसे प्रधान मंत्री का, जो खुद को देश का प्रधान सेवक मानता रहा हो , रैदास मंदिर आना बहुत शुभ है ।संतों ने सेवा कार्य को विशेष महत्व दिया है । आपको याद होगा कि आपने देश में अच्छे दिन लाने का वायदा किया था । इसी संकल्प के साथ आप प्रधानमंत्री बने ।कहा जाता है कि शुभ संकल्प तभी पूरे होते हैं जब संग साथ भी शुभ हो । आपने संतों का संग साथ करने का निश्चय किया है,इसे मैं बहुत आशा भरी नजर से देख रहा हूँ । मुझे उम्मीद हो चली है कि अच्छे दिन आएंगे ।
इस मौके का फायदा उठाकर एक पते की बात धीरे से आपको बता देना चाहता हूँ । संत रैदास ने भी अपने समय में अच्छे दिन का सपना देखा था । बनारस के दो संतों रैदास और कबीर ने अच्छे दिन का एक नक्शा बनाया था । छ सौ से ज्यादा साल हो गए अभी तक रैदास के उस नक्शे के हिसाब से अच्छा दिन नहीं आया । यह जो लाखों की भीड़ आपको दिखाई दे रही है जो देश विदेश के कोने कोने से संत रैदास के दर्शन के लिए उमड़ पड़ती है ,वह चाहती है कि रैदास के नक्शे के हिसाब से देश बने ,समाज बने ।बहुत गहरे उसे यह भरोसा है कि अच्छे दिन संतों के बताए रास्ते से ही आएंगे ।
मैं जब से बनारस आया हूँ तबसे उस नक्शे के बारे में सुन रहा हूँ । संत रैदास और कबीर एक नया शहर बसाना चाहते थे । उस शहर का नाम उन लोगों ने रखा था ‘बेगमपुर’ । रैदास के पास इसका नक्शा है । संतों ने अपनी कल्पना के शहर की खूबियाँ बताई हैं । उन्होने शहर का नाम रखा बे-गमपुर । यहाँ रहने वाले को न कोई दुख होगा न ही किसी तरह की चिन्ता होगी । किसी तरह का टैक्स देने की फिक्र नहीं होगी । उस शहर में न किसी तरह का अपराध होगा न ही दण्ड का विधान । किसी को किसी तरह का भय भी नहीं होगा सब निर्भय होंगे ।यहाँ की शासन व्यवस्था सुद्र्ढ़ होगी। वह खौफ के बल पर नहीं ;बल्कि प्रेम और सद्भाव के बल चलेगी । इस शहर के सभी नागरिक निर्भय होकर रहेंगे । यह ऐसा खूबसूरत वतन होगा जहाँ खैरियत ही खैरियत होगी । इस शहर की बादशाहत मजबूत और मुकम्मल होगी । किसी को संविधान विरुद्ध कुछ करने का साहस नहीं होगा । इस शहर के सभी रहवासी अव्वल दर्जे के नागरिक होंगे । किसी को भी दूसरे या तीसरे दरजे का नागरिक नहीं समझा जाएगा । किसी से भेद भाव नहीं किया जाएगा । भरपूर रोजी रोटी और आबोदाना के लिए यह शहर मशहूर होगा । इस शहर में रहने वाले सुखी और हर तरह से सम्पन्न होंगे । किसी पर कोई रोक टोक नहीं होगी । जिसका जहाँ कहीं भी जाने का मन करेगा वह वहाँ आ जा सकेगा । ऐसे शहर की कल्पना संत रैदास ने की है । मुझे इसलिए भी खुशी हो रही है कि देश का प्रधान मंत्री संत रैदास की संगत चाहता है । मैंने यह भी सुन रखा है कि सभी तरह के मोह और बन्धनों से मुक्त संत रैदास की संगत उसे ही नसीब होगी जो उनके सपनों के शहर बेगमपुर का नागरिक होगा । वह शहर अभी बना तो है नहीं । पिछली किसी सरकार ने बेगमपुर एक्सप्रेस जरूर चला दिया है। वह चल तो रही है ;लेकिन कहीं पहुच नहीं रही है । किसी ने बेगमपुर शहर बसाने की जहमत ही नहीं उठाई । आप देश में कुछ नए शहर भी बसाने वाले हैं ,इसलिए आपसे उम्मीद है । अगर आप सचमुच रैदास की संगत चाहते हैं तो आपको ऐसा शहर बसाना पड़ेगा । आप चाहें तो ऐसा कर सकते हैं ।
मेरी गुजारिश है कि जब आप 22 फरवरी को संत रैदास से मिलें तो और जो बात करनी हो कर लें पर उनसे बेगमपुर का वह नक्शा ज़रूर मांग लीजिए । मेरा यकीन मानिए उस नक्शे में स्मार्ट सिटी का खाका भले ही न मिले भारत के अच्छे दिन का नक्शा जरूर मिल जाएगा । और तब आपका काम आसान हो जाएगा । भारत की सवा अरब आबादी ने आपको इतनी सामर्थ्य दी है कि आप बेगमपुर बना और बसा सकें । अपनी ओर से यह भी याद दिला देना चाहता हूँ कि रैदास का घर प्रेम का घर है । उसमें प्रेम भाव से ही प्रवेश मिलता है ,इतनी सावधानी तो आप बरतेंगे ही । इन्हीं बातों के साथ आपका रैदास के घर यानि बनारस के सीर गोबरधनपुर मुहल्ले में स्वागत है । सुखद और सफल यात्रा के लिए शुभकामनायें ।
आदर सहित
आपका -सदानन्द शाही ,वाराणसी के नागरिक
मतदाता पहचान पत्रINB1932326
18 फरवरी 2016।

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